डब्ल्यूएचओ में आपात कार्यक्रमों के अधिकारी माइक रयान ने गत बुधवार को कहा कि हमें यह बात करनी चाहिए कि कोरोना वायरस अब मानव समाज में अपनी जगह बना लेगा यानी यह पूरी तरह कभी भी ख़त्म नहीं होगा। उन्होंने कहा कि हमें सच्चाई स्वीकार करनी होगी। मैं नहीं समझता कि कोई भी इस बीमारी के ख़त्म होने की डेडलाइन के बारे में कोई भविष्यवाणी कर सकता है।
रयान ने कहा कि दुनिया ने इस बीमारी से निपटने के कुछ तरीक़े निकाल तो लिए हैं लेकिन अभी बहुत कुछ करना बाक़ी है और सबसे बड़ी सफलता यह होगी कि इस बीमारी का वैक्सीन बन जाए।
डाक्टर रयान ने कहा कि एचआईवी भी एक महामारी जैसी ही चीज़ है लेकिन लोगों को इसके बारे में जागरुक किया गया जबकि यह बीमारी पूरी तरह ख़त्म नहीं हुई। इसका इलाज खोजा गया और बचने के तरीक़े निर्धारित किए गए जिसके नतीजे में अब एड्ज़ का उस तरह ख़ौफ़ नहीं है जैसा शुरू में होता था। अब मेडिकल साइंस एचआईवी से संक्रमितो लोगों के लिए भी लंबे जीवन का रास्ता उपलब्ध करा देती है। वर्ष 2018 में दुनिया भर में 3 करोड़ 79 लाख से अधिक एड्ज़ के बीमार थे।
एक और मिसाल मलेरिया की है यह बीमारी भी मानव समाज में मौजूद है और ख़तरनाक भी है यह बीमारी अफ़्रीक़ा महाद्वीप के कुछ भागों में हमेशा मौजूद रहती है। वहां का सफ़र करने वाले सावधानी बरतते हैं और ख़ुद को बचाते हैं।